Saturday, 27 May 2017

काली मिर्च खाने के 36 अद्बुद्ध फायदे

➡ काली मिर्च के 36 अद्भुत फायदे :

उम्र बढ़ने के साथ ही होने वाला गठिया रोग काली मिर्च का इस्तेमाल बहुत ही फयदेमंद होता हैं। इसे तिल के तेल में जलने तक गरम करे। उसके बाद इस तेल को ठंडा होने पर दर्द वाली जगह आदि पर लगाए आपको बहुत ही आराम मिलेगा।

जंक फुड के कारण बवासीर की समस्या आजकल ज़्यादातर लोगो को रोग कर रही हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए जीरा, काली मिर्च और चीनी या मिशरी को पीस कर एक साथ मिला ले। सुबह-शाम दो से तीन बार इसे लेने से बवासीर में राहत मिलती हैं।

पेट दर्द का कारण सिर्फ़ खराब ख़ान-पान ही नही होता हैं, बल्कि कीड़े भी इसकी वजह हो सकते हैं। इससे भूख कम लगती हैं और वजन तेज़ी के साथ घटने लगता हैं। इन्हे डोर करने के लिए च्छच्छ में काली मिर्च का पाउडर मिला कर पिए इसके अलावा काली मिर्च को किसमिस के साथ मिला कर खाने से भी पेट के कीड़े दूर होते हैं।

त्वचा पर कहीं भी फुंसी उठने पर, काली मिर्च पानी के साथ पत्थर पर घिस कर अनामिका अंगुली से सिर्फ फुंसी पर लगाने से फुंसी बैठ जाती है।

काली मिर्च को सुई से छेद कर दीये की लौ से जलाएं। जब धुआं उठे तो इस धुएं को नाक से अंदर खीच लें। इस प्रयोग से सिर दर्द ठीक हो जाता है। हिचकी चलना भी बंद हो जाती है।

ब्लड प्रेशर लो रहता है, तो दिन में दो-तीन बार पांच दाने कालीमिर्च के साथ 21 दाने किशमिश का सेवन करें।

काली मिर्च 20 ग्राम, जीरा 10 ग्राम और शक्कर या मिश्री 15 ग्राम कूट पीस कर मिला लें। इसे सुबह शाम पानी के साथ फंाक लें। बावासीर रोग में लाभ होता है।

आधा चम्मच पिसी काली मिर्च थोड़े से घी के साथ मिला कर रोजाना सुबह-शाम नियमित खाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।

काली मिर्च 20 ग्राम, सोंठ पीपल, जीरा व सेंधा नमक सब 10-10 ग्राम मात्रा में पीस कर मिला लें। भोजन के बाद आधा चम्मच चूर्ण थोड़े से जल के साथ फांकने से मंदाग्रि दूर हो जाती है।

शहद में पिसी काली मिर्च मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से खांसी बंद हो जाती है।
बुखार में तुलसी, कालीमिर्च तथा गिलोय का काढ़ा लाभ करता है।

चार-पांच दाने कालीमिर्च के साथ 15 दाने किशमिश चबाने से खांसी में लाभ होता है।

कालीमिर्च सभी प्रकार के संक्रमण में लाभ देती है।
हर साल अप्रैल के दूसरे सप्ताह की शुरुआत में निम के कोमल 7 ताजा पत्ते, 7 कालिमिर्ची और चुटकी भर सेंधा नमक पानी डालकर पीसकर 5 चम्मच पानी में घोलकर सुबह भूखे पेट एक बार एक दिन में पियें। इसके बाद 2 घंटो तक कुछ न खाएं। यह एक व्यक्ति की खुराक हैं ऐसे लेने से साल भर बुखार नहीं आएगा। हर साल इसी तरह लेते रहे और बुखार से बचें रहे।   

कालिमिर्ची में मौजूद पाईपरिन नामक तत्व कीटाणुनाशक होता हैं। यह मलेरिया और वायरस जैसे ज्वरो के विषाणुओं को नष्ट कर देता हैं। 60 ग्राम पीसी हुई कालिमिर्ची 2 ग्लास पानी में इतना उबालें की आधा ग्लास पानी रह जाये फिर इसे छानकर हर 4 घंटे से उसके 3 भाग करके पियें। इससे मलेरिया बुखार ठीक हो जाता हैं।

सिर में डेंड्रफ और खुजली के वजह से बाल गिरते हो तो कालिमिर्ची, प्याज, नमक सबको पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं। बालो का झड़ना बंद हो जायेगा।
अगर बाल सफ़ेद हो गए हो तो 10 कालिमिर्ची रोजाना सुबह भूखे पेट और शामको चबाकर निगल जाएं। यह प्रयोग कम से कम एक साल से ज्यादा करें। यह आजमाया हुआ प्रयोग हैं। कालिमिर्ची मीठे तेल, (तिल का तेल) मिलाकर लगाएं तो और अधिक लाभ होगा।
कालिमिर्ची और फिटकरी समान मात्रा में बारीक पीसकर मिला लें। थोड़ा सा पाउडर लेकर पानी डालकर पेस्ट बनाकर तिनके की रुई लगाकर फुरेरी से मस्सों पर रोजाना दिन में 3 बार लगाएं। मस्से हट जायेंगे।

फोड़ा, फुंसी, दाध, खुजली आदि पर पीसी कालिमिर्ची और घी मिलाकर लगाए लाभ होता हैं।

हरे पुदीना के 30 पत्ती 2-2 चम्मच सौंफ और मिश्री, 5 कालिमिर्ची सब में पानी डालकर पीसकर एक कप गर्म पानी में घोलकर छानकर पिने से हिचकी बंद हो जाएगी।

5 कालिमिर्ची जलाकर पीसकर बार बार सूंघने से हिचकी बंद हो जाती हैं।

निम की निम्बोली के अंदर की सुखी गिरी और कालिमिर्ची को बराबर मात्रा में लेकर दोनों को कूटपीसकर आधा चम्मच रोजाना सुबह भूखे पेट पानी से फांकी 2 सप्ताह तक लें। इससे आशातीत लाभ होंगे, चाहे केसा भी बवासीर हो ठीक हो जाती हैं।

यह पाचनशक्ति बढ़ाती हैं। एक कालिमिर्ची, जीरा, सेंधा नमक, सोडा, पीपल सब समान भाग में लेकर पिसलें खाना खाने के बाद आधा चम्मच पानी से 2 बार लें। खाना अच्छी तरह से पचेगा हजम होगा।

अगर खाना ठीक से नहीं पचता हो और शौच ढीली और आंवयुक्त होती हो तो कालिमिर्ची सेंधा नमक अजवाइन सुखा पोदीना बड़ी इलायची समान भाग में पीसकर एक-एक चम्मच 2 बार खाने के बाद फांक लें।
5 ग्राम कालिमिर्ची पीसकर आधा चम्मच गाय के घी के साथ लेने से सब तरह की खुजली और विष का प्रभाव दूर हो हो जाता हैं। फुंसी उठते ही उसपर कालिमिर्ची पानी में पीसकर लगाने से फुंसी बैठ जाती हैं। गुहेरी, बाल तोड़ फोड़े भी ठीक हो जाते हैं।

कुत्ते के काटने पर प्राथमिक उपचार के तोर पर कालिमिर्ची पीसकर घाव पर भुरक दें और फिर डॉकटर को भी दिखा दें। ऐसा करने से जहर का प्रभाव कम हो जायेगा।

चाय में कालिमिर्ची, लौंग, दाल चीनी, सोडा, छोटी इलायची अपने टेस्ट के हिसाब से डालकर पिने से स्फूर्ति आती हैं। आलसी और उदासीनता दूर हो जाती हैं। थकान होने पर, मानसिक संताप, दुःख होने पर यह चाय जरूर पियें।

5 कालिमिर्ची और 10 किशमिश मिलाकर चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
कालिमिर्ची स्वाद तन्तु को उत्तेजित कर पाचनशक्ति बढाती हैं। आंतो में बनने वाली गैस को बनने से भी रोकती हैं।

गुड कालिमिर्ची पीसकर मिलाकर थोड़ा-थोड़ा रोजाना दिन में 3 बार खाएं और गर्म पानी पिएं।

पित्त, दौर्बल्य, नैत्रज्योतिवर्धक : चौथाई चम्मच पीसी कालिमिर्ची आधा चम्मच घी या मक्खन में मिलाकर चाटें जो इसके कड़वेपन के कारण नहीं खा सके वह इसमें मिश्री मिलाकर खा सकते हैं।

फुंसी, फोड़े कच्चे बिना पके, खुजली और दाद में उपरोक्त नुस्खे के साथ कालिमिर्ची पानी डालकर चटनी की तरह पीसकर लगाएं।

आधे सिर का वह दर्द जो की सूर्य उदय के साथ होता हो, इसमें कालिमिर्ची के 10 दाने और 2 चम्मच मिश्री को कुटपिसकर सुबह सूर्यौदय से पहले फांक लेने से लाभ होता हैं।

छुरी, चाक़ू से कटने पर घांव पर पानी डालकर साफ़ कर उस पर कालिमिर्ची का पाउडर छिड़कर दबा दें। खून बहना तत्काल रुक जायेगा। दर्द और इन्फेक्शन भी नहीं होंगे। क्योंकि कालिमिर्ची दर्द निवारक, एंटी बैक्टीरियल और एंटीसॉफ्टिक होती हैं। घाव पर कालिमिर्ची पाउडर से जलन भी नहीं होंगी।

एक परिवार में 5 व्यक्तियों के लिए चटनी का अनुपात मुनक्का 10, अदरक 10 ग्राम, लॉन्ग 5, तुलसी के पत्ते 20 और अपने टेस्ट के हिसाब से नमक, जीरा, कालिमिर्ची मिलाकर चटनी बनाकर हर तीसरे दिन खाते रहने से वर्षा ऋतू के दुष्प्रभाव से बचाव होता हैं।
चुटकीभर पीसी कालिमिर्ची एक चम्मच शहद में मिलाकर रोजाना 2 बार चाटें। इससे बुद्धि का विकास भी होगा।

प्याज के दो टुकड़ों को गर्दन पर रगड़ने से करे थाइराइड का जड़ से सफाया

प्याज के दो गोल टुकड़े को गर्दन के दोनों तरफ रगड़ने से थाइराइड का जड़ से सफाया, ये है वैज्ञानिक दावा, जरूर पढ़े और शेयर करे

➡ लाल प्याज से थाइराइड का चमत्कारिक उपचार रूस के एक प्रसिद्ध चिकित्सक का दावा है

थायराइड की समस्या आजकल एक गंभीर समस्या बनी हुई है। थायराइड मानव शरीर मे पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है। थाइराइड गर्दन के सामने और स्वर तंत्र के दोनों तरफ होती है। यह थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है जिससे शरीर के ऊर्जा क्षय, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है। थायराइड तितली के आकार की होती है। थायराइड दो तरह का होता है। हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायराइड। पुरूषों में आजकल थायराइड की दिक्कत बढ़ती जा रही है। थायराइड में वजन अचानक से बढ़ जाता है या कभी अचानक से कम हो जाता है। इस रोग में काफी दिक्कत होती है।

थायराइड को साइलेंट किलर माना जाता है, क्योंकि इसके लक्षण व्यक्ति को धीरे-धीरे पता चलते हैं और जब इस बीमारी का निदान होता है तब तक देर हो चुकी होती है। इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से इसकी शुरुआत होती है लेकिन ज्यादातर चिकित्सक एंटी बॉडी टेस्ट नहीं करते हैं जिससे ऑटो-इम्युनिटी दिखाई देती है।

आज कल की भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में ये समस्या आम सी हो गयी हैं, और अलोपथी में इसका कोई इलाज भी नहीं हैं, बस जीवन भर दवाई लेते रहो, और आराम कोई नहीं।

जुकाम होना : थाइराइड होने पर आदमी को जुकाम होने लगता है। यह नार्मल जुकाम से अलग होता है और ठीक नहीं होता है।

डिप्रेशन : थाइराइड की समस्या होने पर आदमी हमेशा डिप्रेशन में रहने लगता है। उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता है, दिमाग की सोचने और समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है। याद्दाश्त भी  कमजोर हो जाती है।

बाल झड़ना : थाइराइड होने पर आदमी के बाल झड़ने लगते हैं तथा गंजापन होने लगता है। साथ ही साथ उसके भौहों के बाल भी झड़ने लगते है।

➡ थायराइड आखिर क्यो होता है क्या कारण हो सकते है।

जब तनाव का स्तर बढ़ता है तो इसका सबसे ज्यादा असर हमारी थायरायड ग्रंथि पर पड़ता है। यह ग्रंथि हार्मोन के स्राव को बढ़ा देती है।

यदि आप के परिवार में किसी को थायराइड की समस्या है तो आपको थायराइड होने की संभावना ज्यादा रहती है। यह थायराइड का सबसे अहम कारण है।
कई बार कुछ दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव भी थायराइड की वजह होते हैं।

ग्रेव्स रोग थायराइड का सबसे बड़ा कारण है। इसमें थायरायड ग्रंथि से थायरायड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है। ग्रेव्स रोग ज्यादातर 20 और 40 की उम्र के बीच की महिलाओं को प्रभावित करता है, क्योंकि ग्रेव्स रोग आनुवंशिक कारकों से संबंधित वंशानुगत विकार है, इसलिए थाइराइड रोग एक ही परिवार में कई लोगों को प्रभावित कर सकता है।
थायराइड की समस्या पिट्यूटरी ग्रंथि के कारण भी होती है क्यों कि यह थायरायड ग्रंथि हार्मोन को उत्पादन करने के संकेत नहीं दे पाती।

थायरायडिस- यह सिर्फ एक बढ़ा हुआ थायराइड ग्रंथि (घेंघा) है, जिसमें थायराइड हार्मोन बनाने की क्षमता कम हो जाती है।

भोजन में आयोडीन की कमी या ज्यादा इस्तेमाल भी थायराइड की समस्या पैदा करता है।

इसोफ्लावोन गहन सोया प्रोटीन, कैप्सूल, और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग भी थायराइड होने के कारण हो सकते है।

सिर, गर्दन और चेस्ट की विकिरण थैरेपी के कारण या टोंसिल्स, लिम्फ नोड्स, थाइमस ग्रंथि की समस्या या मुंहासे के लिए विकिरण उपचार के कारण।
रजोनिवृत्ति भी थायराइड का कारण है क्योंकि रजोनिवृत्ति के समय एक महिला में कई प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन होते है। जो कई बार थायराइड की वजह बनती है।

थायराइड का अगला कारण है गर्भावस्था, जिसमें प्रसवोत्तर अवधि भी शामिल है। गर्भावस्था एक स्त्री के जीवन में ऐसा समय होता है जब उसके पूरे शरीर में बड़े पैमाने पर परिवर्तन होता है, और वह तनाव ग्रस्त रहती है।

➡ थाइराइड का सरल और कारगर उपचार :
सेंट पीटर्सबर्ग, रूस से एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने थायराइड ग्रंथि के विकारों का इलाज खोजने का दावा किया है इस अविश्वसनीय उपाए में सिर्फ एक घरेलु औषधि का उपयोग होता है और वो है लाल प्याज।
प्याज के गुणों के बारे में हम सब जानते हैं इसमें बहुत सारे anti-bacterial, anti-fungal, anti-inflammatory, and cancer fighting गुण होते हैं इस में विटामिन और मिनरल्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो हमारे शारीर को पोषण देते हैं और बिमारियों से बचाते हैं।

रात में ज्यादा पेशाब आता है तो संभल जाईये

ज्यादा पेशाब आता है तो संभल जाईए:-

जापान के डॉक्टरों का कहना है कि जिन्हें रात में जगकर बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ता है, उन्हें अपने खाने में नमक की मात्रा में कटौती करनी चाहिए.

इस समस्या को नौक्चुरिया कहा जाता है. इससे लोग 60 की उम्र के बाद प्रभावित होते हैं. इससे पीड़ित लोगों की नींद ख़राब होती है और लोगों का जीवन भी प्रभावित होता है.

यह स्टडी 300 से ज़्यादा लोगों पर की गई है. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन्होंने नमक की मात्रा को कम किया उन्हें रात में बार बार पेशाब करने की समस्या से भी निजात मिल गई. ब्रिटेन के डॉक्टरों का भी कहना है कि सही आहार से इस समस्या के लक्षण को कम किया जा सकता है.

नागासाकी यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने अपनी स्डटी के नतीजे को लंदन के यूरोपियन सोसायटी ऑफ यूरोलॉजी कांग्रेस में प्रस्तुत किया.

जो ज़्यादा नमक खाते हैं उन मरीज़ों पर तीन महीने तक निगरानी रखी गई कि वे नींद की समस्या से पीड़ित हैं. उनसे कहा गया कि वे अपने आहार में नमक की कटौती करें. जिन्होंने ऐसा किया उनमें बार-बार पेशाब करने की आदत कम हुई.

जो रात में दो बार से ज़्यादा पेशाब करते थे वे एक बार तक ही रूक गए. इसका असर दिन में भी साफ़ दिखा और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ.

इस स्टडी में 98 लोगों को ज़रूरत से ज़्यादा नमक खिलाया गया था और इसका असर ठीक उलटा दिखा. ये रात में कई बार पेशाब करने के लिए उठे.

इस स्टडी को अंजाम देने वाले डॉ मात्सुओ तोमोहिरो ने कहा कि इसकी पुष्टि के लिए और बड़ी स्टडी की ज़रूरत है, लेकिन इससे बुज़ुर्गों को निश्चित तौर पर मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा कि अपने आहार को ठीक करने से जीवन को कई मामलों में ठीक बनाया जा सकता है. ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी में नौक्चुरिया विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर मार्कस ड्रेक का कहना है कि जितनी मात्रा में लोग नमक खाते हैं उसका सामान्य तौर पर नौक्चुरिया से कोई संबंध नहीं होता है. सामन्यातः डॉ पानी पीने की मात्रा को देखते हैं. बिस्तर पर जाने से पहले कितना पानी पीते हैं यह भी मायने रखता है.

50 की उम्र के बाद आधे से ज़्यादा पुरुषों और महिलाओं को रात में ब्लैडर खाली करने के लिए नींद ख़राब करनी पड़ती है. यह सामान्य तौर पर ज़्यादा उम्र के लोगों में आम समस्या है. इनमें से ज़्यादातार लोग कम से कम दो बार ज़रूर जागते हैं.

यदि आप रात में दो बार से ज़्यादा पेशाब करने के लिए उठते हैं तो नींद ख़राब होती है. इससे तनाव बढ़ता है, उलझन होती है और चिड़चिड़ाहट भी बढ़ती है.

महज़ बूढ़े होने का साइट इफ़ेक्ट नहीं

उम्र के साथ हॉर्मोन्स में तब्दीलियां आती हैं. इसी कारण रात में ज़्यादा पेशाब होता है. उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों के प्रोस्टेट ग्रंथि अक्सर बढ़ने लगती है. बड़ा प्रोस्ट्रेट ट्यूब पर दबाव बना सकता है और इससे पेशाब भी ज़्यादा होता है.

लेकिन पूरी कहानी यही नहीं है. नौक्चुरिया आपकी सेहत से जुड़ी समस्या का एक संकेत है कि कहीं आप डायबिटीज़ से तो पीड़ित नहीं हैं. आप हार्ट या नींद नहीं आने की समस्या से भी पीड़ित हो सकते हैं.

कितना नमक ज़्यादा है?

ब्रिटेन में वयस्कों को हर दिन 6 ग्राम नमक खाने की सलाह दी जाती है. यह 2.4 ग्राम सोडियम के बराबर होना चाहिए. बच्चों को तीन सालों तक रोज दो ग्राम नमक खाना चाहिए. सात से 10 साल की उम्र में इसे बढ़ाकर 5 ग्राम कर देना चाहिए. 11 की उम्र के बाद बच्चों को भी 6 ग्राम रोज नमक खाना चाहिए.

रात में किस खाने में ज़्यादा नमक होता है?

ब्रेड और अनाज के नाश्ते में जितना आप सोचते हैं उससे ज्यादा नमक होता है. बेकन, हैम, चीज़, क्रिस्प्स और पास्ता चटनी में भी ज़्यादा नमक होता है. जब आप कोई भी प्रोसेस्ड फूड ख़रीदें तो पैकेट पर प्रति 100 ग्राम में कितना नमक है इसे ज़रूर देखें.

साबूदाना एक मांसाहारी आहार है जानिए सच

आइये देखते हैं आपके पंसदीदा साबूदाना बनाने के तरीके को

यह तो हम सभी जानते हैं कि साबूदाना व्रत में खाया जाने वाला एक शुद्ध खाद्य माना जाता है, पर क्या हम जानते हैं कि साबूदाना बनता कैसे है? आइए देखते हैं साबूदाने की हकीक़त को, फिर आप खुद ही निश्चय कर सकते हैं कि आखिर साबूदाना शाकाहारी है या मांसाहारी।  तमिलनाडु प्रदेश में सालेम से कोयम्बटूर जाते समय रास्ते में साबूदाने की बहुत सी फैक्ट्रियाँ पड़ती हैं, यहाँ पर फैक्ट्रियों के आस-पास भयंकर बदबू ने हमारा स्वागत किया। तब हमने जाना साबूदाने कि सच्चाई को। साबूदाना विशेष प्रकार की जड़ों से बनता है। यह जड़ केरला में होती है। इन फैक्ट्रियों के मालिक साबूदाने को बहुत ज्यादा मात्रा में खरीद कर उसका गूदा बनाकर उसे 40 फीट से 25 फीट के बड़े गड्ढे में डाल देते हैं, सड़ने के लिए। महीनों तक साबूदाना वहाँ सड़ता रहता है। यह गड्ढे खुले में हैं और हजारों टन सड़ते हुए साबूदाने पर बड़ी-बड़ी लाइट्स से हजारों कीड़े मकोड़े गिरते हैं।

फैक्ट्री के मजदूर इन साबूदाने के गड्ढो में पानी डालते रहते हैं, इसकी वजह से इसमें सफेद रंग के कीट पैदा हो जाते हैं। यह सड़ने का, कीड़े-मकोड़े गिरने का और सफेद कीट पैदा होने का कार्य 5-6 महीनों तक चलता रहता है। फिर मशीनों से इस कीड़े-मकोड़े युक्त गुदे को छोटा-छोटा गोल आकार देकर इसे पॉलिश किया जाता है। आप लोगों की बातों में आकर साबूदाने को शुद्ध ना समझें। साबूदाना बनाने का यह तरीका सौ प्रतीशत सत्य है। इस वजह से बहुत से लोगों ने साबूदाना खाना छोड़ दिया है। जब आपको साबूदाना का सत्य पता चल गया है, तो इसे खाकर अपना जीवन दूषित ना करें।

कृपया इस पोस्ट को समस्त सधर्मी बंधुओं के साथ शेयर करके उनका व्रत और त्यौहार अशुद्ध होने से बचाए।

सोने से 15 मिनट पहले जलाए सिर्फ एक तेज पत्ता फिर देखिए आश्चर्यजनक परिणाम

सोने से पहले कमरे में जलाएं केवल 1 तेज पत्ता, सिर्फ़ 15 मिनट में आपको जो फ़ायदा होगा जिसकी आपने कभी कल्पना नही की होगीरात को अच्छी नींद सोना है तो ज़रूरी है आपको किसी तरह का कोई तनाव न हो। आपका मन शांत हो। आप सुकून महसूस करें। लेकिन अमूमन ये हो नहीं पाता। दिनभर चाहे आप दफ्तर में रहें, कॉलेज जाएं या घर के कामों में उलझे रहें… तनाव हो ही जाता है। तनाव यानी स्ट्रेस। ये तनाव आपको रात को सोने नहीं देता।

ये आपको मानसिक और शारीरिक तरीके से नुकसान पहुंचाता है। अगर आप छोटी सी कोशिश करें तो तनाव को मिनटों में दूर कर सकते हैं। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं बस एक तेज़ पत्ता चाहिए।
तेज़ पत्ता हर किसी की किचन में बड़े ही आराम से मिल जाता है। ये सिर्फ 5 मिनट में आपके तनाव को दूर करने की क्षमता रखता है। एक रशियन साइंटिस्ट ने इस पर स्टडी की और पाया कि यह हमारे तनाव को दूर कर सकता है। यही वजह है कि तेज पत्‍ते को अरोमाथैरेपी के लिये इस्‍तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, तेज़ पत्ता यह त्‍वचा की बीमारियों और सांस से संबन्‍धित समस्‍याओं को भी ठीक करने के लिये जाना जाता है।

कैसे करें इस्तेमाल :

एक तेज पत्ता लें और उसे किसी कटोरी या एैशट्रे में जला लें। अब इसे कमरे के अंदर लाकर 15 मिनट के लिए रख देंगे। आप पाएंगे कि तेज पत्‍ते की खुशबू पूरे कमरे में भर जाएगी। साथ ही आपको कमरे का माहौल काफी सुकून वाला लगेगा। ये आपको स्पा एक्सपीरियेंस देगा। कुछ देर इस कमरे में रिलेक्स होकर बैठ जाएं, आपको अपने अंदर सुकून बहता हुआ महसूस होगा और आपका तनाव कम होने लगेगा।

Friday, 26 May 2017

गर्मियो में वरदान है ठंडाई

गर्मियो में वरदान ठंडाई-

मिसाल के तौर पर ठंडाई में बादाम, पिस्‍ता, केसर, इलायची और गुलाब पड़ता है. गुलाब ठंडाई में इसलिए जरूरी होता है क्योंकि इससे फ्लेवर आता है. दूसरा, ये शरीर को ठंडक भी पहुंचाता है.

ठंडाई में खरबूजे के बीज भी पड़ते हैं जो शरीर को ठंडा रखते हैं. इन सबको मिलाकर ही ठंडाई बनाई जाती है. इन सबमें थोड़ा गुड या शक्कर भी मिलाया जाता है.
घर में बनाई ठंडाई बेहद पौष्टिक होती है. ठंडाई के पेस्ट को अलग से बनाया जाता है.

ठंडाई अपने आपमें पूरा खाना है. कई बार बच्चे ठीक से खाना नहीं खाते तो उन्हें ठंडाई पिला सकते हैं.

ठंडाई लेते हुए ध्यान दें कि इसे फलों के साथ बिलकुल ना लें. खासतौर पर संतरे, मौसमी और खट्टे फलें के साथ.

ठंडाई को बनाकर फ्रीज में रख दें और जब बच्चे स्कूल से दोपहर में आते हैं तो उन्हें ये ड्रिंक दे इससे उन्हें तरोताजा महसूस होगा.

ठंडाई पीने से इम्यून सिस्टम बढ़ता है. ये बालों और त्वचा के लिए भी बहुत अच्छा है.

ठंडाई में पड़ने वाले बीजों में बहुत से पोषक तत्व खासतौर पर मिनरल्स होते हैं जो कि आपको सेहतमंद रखते हैं. तो इन गर्मियों में आप खुद तो ठंडाई पीजिए ही साथ ही अपने मेहमानों को भी पिलाइए.

शहद में डूबे लहसुन खाने के फायदे

शहद में डूबे हुए लहसुन खाने के फायदे-

शहद और लहसुन, इसका इस्तेमाल तो हर घर में किया जाता है और ये दोनों सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी साबित होते हैं। लहसुन में एलिसिन और फाइबर मौजूद होते हैं जो शरीर को कई पौषक तत्व प्रदान करते हैं और शहद अपने एंटी-बायेटिक और एेंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इसका मतलब ये दोनों चीजे शरीर को काफी फायदा पहुंचाती हैं। अगर शहद और लहसुन इन दोनों को मिलाकर इसका सेवन किया जाए तब तो यह शरीर के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है।

बनाने का तरीका

– सबसे पहले 2-3 लहसुन की कली को छिल लें। फिर इसकी कलियों को हल्का सा दबा कर कूट लें।

– इसके बाद इसमें शहद मिलाएं और कुछ देर के लिए ऐसी रहने दें ताकि लहसुन में पूरा शहद समा जाए।

– अब इसका सेवन रोज सुबह खाली पेट 7 दिन तक करें।

इसे खाने के फायदे-

1. कैंसर

लहसुन और शहद कैंसर के मरीज के लिए एक प्राकृतिक दवा है। इसका सेवन करने से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा कम होता है।

2. कोलेस्ट्रोल

इन दोनों को मिलाकर खाने से बैड कोलेस्ट्रोल कम होता है। इसके अलावा इसके सेवन से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन भी ठीक बना रहता है।

3. डिटॉक्स

देखा जाए तो ये वैसे एक प्राकृतिक स्त्रोत है, जो शरीर को अंदर से साफ करने में मदद करता है।

4. संक्रमण

इन दोनों चीजों में एंटी-बैक्टीरियल गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते है, जो संक्रमण को दूर रखने में मदद करते हैं।

5. सर्दी-जुकाम

इसका सेवन करने से शरीर में गर्मी पैदा होने लगती है, जिससे कि आप सर्दी-जुकाम जैसी समस्या से निजात पा सकते हैं।

दम अरबी

दम अरबी बनाने की विधि-

अरबी कई प्रकार से बनती है लेकिन उबाली हुई अरबी को तल करके इसकी ग्रेवी को हल्की आग में दम देकर बनाई दम अरबी आपको बहुत पसन्द आयेगी.

आवश्यक सामग्री -

अरबी- 400 ग्राम ( 12-14 मध्यम आकार की)
टमाटर - 3
हरी मिर्च - 2 -4
अदरक - 1 इंच लम्बा टुकड़ा
दही -  1/4- 1/2 कप
हींग - 1-2 पिंच
अजवायन - 1/2 छोटी चम्मच
हल्दी पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
धनियां पाउडर - 1 छोटी चम्मच
नमक - स्वादानुसार (3/4 छोटी चम्मच)
लाल मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच से कम
गरम मसाला - 1/4 छोटी चम्मच से कम
हरा धनियां - 2 टेबल स्पून (बारीक कतरा हुआ)
तेल - अरबी तलने के लिये और सब्जी बनाने के लिये

विधि -

अरबी को अच्छी तरह पानी से धोकर साफ कर लीजिये.

अरबी और एक छोटा गिलास पानी कुकर में डाल कर अरबी को एक सीटी आने तक उबाल लीजिये, कुकर का ढक्कन खुलने पर अरबी को निकालिये, ठंडा होने पर छीलिये. छिली अरबी को हथेलियों से दबा कर थोड़ा चपटा आकार दे दीजिये.

टमाटर धोइये, बड़े टुकड़े में काटिये. हरी मिर्च के डंठल तोड़ कर धो लीजिये. अदरक छीलिये, धोइये, बड़े टुकड़ों में काटिये, सभी को मिक्सर में डालकर बारीक पीस लीजिये.

दही को भी फैट लीजिये.

कढ़ाई में तेल डालकर गरम कीजिये, अरबी को गरम तेल में डालिये, 4- 5 अरबी तेल में डाल दीजिये और हल्की ब्राउन होने पर निकाल कर प्लेट में रखिये, सारी अरबी इसी तरह तल कर निकाल लीजिये.

तरी के लिये 2 टेबल स्पून तेल छोड़ कर कढ़ाई से सारा तेल निकाल लीजिये, गरम तेल में अजवायन और हींग डालिये, अजवायन भुनने पर, हल्दी पाउडर और धनियां पाउडर डालिये, हल्का सा भूनिये, टमाटर का पिसा मसाला डालिये, मसाले को तब तक भूनिये जब तक कि मसाले के ऊपर तेल न तैरने लगे, फैटा हुआ दही डाल कर, मसाले को 2 मिनिट और भून लीजिये.

भुने मसाले में तली अरबी, नमक, लाल मिर्च और गरम मसाला डालिये और 2 मिनिट भूनिये, 1 गिलास पानी डालिये, और इसे अच्छी तरह से ढककर बिलकुल धीमी आग पर सब्जी को 10 मिनिट तक दम दीजिये.

दम अरबी बन चुकी है, सब्जी में हरा धनियां डालकर मिला दीजिये.

स्वादिष्ट दम अरबी को परांठा, चपाती, नान या चावल के साथ परोसिये और खाइये.

पारंपरिक रूप से लोग अरबी में दम देते समय पकाने वाले बर्तन के ढक्कन को गूंथे हुये आटे से बन्द कर देते हैं ताकि इसकी भाप बाहर न निकले लेकिन यदि आपके पैन का ढक्कन अच्छी तरह फिट हो जाता है तो आप इसे बिना गूंथे हुये आटे से बन्द किये भी बना सकते हैं.

सुझाव:

यदि आप प्याज खाते हैं तो एक प्याज और 3-4 लहसन की कली को बारीक काट कर, अजवायन भुनने के बाद कटी प्याज और लहसन डालिये, प्याज के हल्के गुलाबी होने तक भून लीजिये, अब सभी मसाले उपरोक्त तरीके से डाल कर दम अरबी बना लीजिये.

अनेक रोगों में रामबाण का काम करती है भिंडी

भिन्डी से करे अनेक रोगों का पचार-

डायबिटीज का इलाज है भिंडी के पास : डायबिटीज के इलाज में उपयोगी होती है. भिंडी में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिसकी वजह से यह डायबिटीज के इलाज में उपयोगी होती है। दो भिंडी लें के दोनों सिरों को काटकर उसे एक गिलास पानी में डालकर रात भर रख दें। सुबह उठकर भिंडी निकालकर इस पानी को पिएं। ये इन्सुलिन को बढ़ाता है साथ ही इसके पानी से शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ेगी और ब्लड शुगर नियंत्रण में रहेगा। इसका असर आपको 15 दिनों में देखने को मिल सकता है क्योंकि यह ब्लड शुगर के लेवल पर निर्भर करता है। यदि यह ज्यादा है तो कुछ सप्ताह लग सकते है यदि कम है तो कुछ दिनों में परिणाम मिल सकता है।

विटामिन K का है खजाना : भिंडी में विटामिन के भरपूर मात्रा में होता है, जो रक्त संचार को बनाए रखता है. भोजन में भिंडी खाने से शरीर में विटामिन के की मात्रा संतुलित रहती है, जिससे रक्‍त के थक्के नहीं बनते।

प्रेग्नेंसी में जरूर खाएं भिंडी : वे महिलाएं, जो गर्भवती हैं या फिर गर्भधारण करना चाहती हैं, उन्हें भिंडी का सेवन जरूर करना चाहिए. भिंडी में काफी मात्रा में फॉलिक एसिड होता है, जो भ्रूण के विकास के लिए जरूरी है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है : भिंडी में विटामिन सी पाया जाता है, जिसकी वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. शरीर में विटामिन सी की संतुलित मात्रा होने से मौसमी एलर्जी होने का खतरा भी कम रहता है।

आंखों के लिए फायदेमंद है भिंडी : विटामिन ए और बीटा कैरोटीन आंखों की रौशनी बढ़ाता है. भिंडी में ये दोनों ही प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
भिंडी के सेवन से वजन नहीं बढ़ता है : भिंडी में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और फाइबर काफी होता है. वजह से यह शरीर को भरपूर ऊर्जा तो देती है, लेकिन इसके सेवन से वजन नहीं बढ़ता है।

कब्‍ज का रामबाण इलाज : अगर आप कब्‍ज से परेशान हैं तो अपने भोजन में भिंडी को शामिल कर लें. भिंडी में मौजूद फाइबर रोज सुबह पेट साफ करने में मददगार होते हैं।

भिन्डी है अनेक रोगों का उपचार

भिन्डी से करे अनेक रोगों का पचार-




डायबिटीज का इलाज है भिंडी के पास : डायबिटीज के इलाज में उपयोगी होती है. भिंडी में फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिसकी वजह से यह डायबिटीज के इलाज में उपयोगी होती है। दो भिंडी लें के दोनों सिरों को काटकर उसे एक गिलास पानी में डालकर रात भर रख दें। सुबह उठकर भिंडी निकालकर इस पानी को पिएं। ये इन्सुलिन को बढ़ाता है साथ ही इसके पानी से शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ेगी और ब्लड शुगर नियंत्रण में रहेगा। इसका असर आपको 15 दिनों में देखने को मिल सकता है क्योंकि यह ब्लड शुगर के लेवल पर निर्भर करता है। यदि यह ज्यादा है तो कुछ सप्ताह लग सकते है यदि कम है तो कुछ दिनों में परिणाम मिल सकता है।

विटामिन K का है खजाना : भिंडी में विटामिन के भरपूर मात्रा में होता है, जो रक्त संचार को बनाए रखता है. भोजन में भिंडी खाने से शरीर में विटामिन के की मात्रा संतुलित रहती है, जिससे रक्‍त के थक्के नहीं बनते।

प्रेग्नेंसी में जरूर खाएं भिंडी : वे महिलाएं, जो गर्भवती हैं या फिर गर्भधारण करना चाहती हैं, उन्हें भिंडी का सेवन जरूर करना चाहिए. भिंडी में काफी मात्रा में फॉलिक एसिड होता है, जो भ्रूण के विकास के लिए जरूरी है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है : भिंडी में विटामिन सी पाया जाता है, जिसकी वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. शरीर में विटामिन सी की संतुलित मात्रा होने से मौसमी एलर्जी होने का खतरा भी कम रहता है।

आंखों के लिए फायदेमंद है भिंडी : विटामिन ए और बीटा कैरोटीन आंखों की रौशनी बढ़ाता है. भिंडी में ये दोनों ही प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
भिंडी के सेवन से वजन नहीं बढ़ता है : भिंडी में कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है और फाइबर काफी होता है. वजह से यह शरीर को भरपूर ऊर्जा तो देती है, लेकिन इसके सेवन से वजन नहीं बढ़ता है।

कब्‍ज का रामबाण इलाज : अगर आप कब्‍ज से परेशान हैं तो अपने भोजन में भिंडी को शामिल कर लें. भिंडी में मौजूद फाइबर रोज सुबह पेट साफ करने में मददगार होते हैं।