Wednesday, 30 September 2015

मोटापा घटाने के 15 आसान उपाय

मोटापा घटाने के 15 आसान उपाय

यह पता करना हमेशा ही महत्‍वपूर्ण रहा है कि फ्लैट टमी पाने के आपको क्‍या करना चाहिए क्‍या नहीं। फ्लैट टमी पाने की दिशा में सबसे पहला कदम है। आइए इस बारे में जानने के लिए पढ़ें यह स्‍लाइड शो।


1) फ्लैट टमी पाने के उपाय एक फ्लैट टमी पाना हर किसी की इच्‍छा होती है। लेकिन इसे पूरा करने का सही तरीका क्‍या है। लोग, अक्‍सर इसी सवाल पर आकर उलझ जाते हैं। लेकिन यह पता करना हमेशा ही महत्‍वपूर्ण रहा है कि फ्लैट टमी पाने के आपको क्‍या करना चाहिए क्‍या नहीं। फ्लैट टमी पाने की दिशा में सबसे पहला कदम है। आइए इस बारे में जानने के लिए पढ़ें । 

शहद के ये 15 गुण

* अदरक के रस में या अडूसे के काढ़े में शहद मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है।

Tuesday, 29 September 2015

गुड़ खाने से 18 फायदे

16  पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

 17   गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढती है। 

18  पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खाने से श्वास रोग से छुटकारा मिलता है। अच्छी बातें , अच्छे लोगों, अपने मित्र , रिश्तेदार और ग्रुप मे अवश्य शेयर करे.
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गुड़ खाने से 18 फायदे



12  गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा की परेशानी नहीं होती है।



13  जुकाम जम गया हो, तो गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खिलाएं। 


14  गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है। 


15  भोजन के बाद गुड़ खा लेने से पेट में गैस नहीं बनती ।
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गुड़ खाने से 18 फायदे


8 एनर्जी के लिए -- बुहत ज़्यादा थकान और कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता। दिनभर काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो, तुरंत गुड़ खाएं। 

9 गुड़ शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित रखता है। इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं, इसलिए दमा के मरीज़ों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है।

 10 जोड़ों के दर्द में आराम -- रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक का सेवन करें, इससे जोड़ों के दर्द की दिक्कत नहीं होगी।

 11 गुड़ के साथ पके चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल जाती है।
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गुड़ खाने से 18 फायदे

3 पाचन क्रिया को सही रखना 

4 गुड़ शरीर का रक्त साफ करता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है। रोज एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है। इससे गैस की दिक्कत नहीं होती। जिन लोगों को गैस की परेशानी है, वो रोज़ लंच या डिनर के बाद थोड़ा गुड़ ज़रूर खाएं

 5 गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका सेवन बहुत अधिक ज़रूर है

 6  त्वचा के लिए -- गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन दूर करता है, जिससे त्वचा दमकती है और मुहांसे की समस्या नहीं होती है। 

7 गुड़ की तासीर गर्म है, इसलिए इसका सेवन जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
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गुड़ खाने से 18 फायदे

 गुड़ खाने से 18 फायदे


* खड़े खड़े पानी पीने वाले का घुटना दुनिया का कोई डॉक्टर ठीक नहीँ कर सकता। * तेज पंखे के नीचे या A. C. में सोने से मोटापा बढ़ता है। * 70% दर्द में एक ग्लास गर्म पानी किसी भी पेन किलर से भी तेज काम करता है। * कुकर में दाल गलती है, पकती नहीँ। इसीलिए गैस और एसिडिटी करती है। * अल्युमिनम के बर्तनों के प्रयोग से अंग्रेजों नें देशभक्त भारतीय क़ैदियों को रोगी बनाया था। * शर्बत और नारियल पानी सुबह ग्यारह के पहले अमृत है। * लकवा होते ही मरीज के नाक में देशी गाय का घी डालने से लकवा पन्द्रह मिनट मेँ ठीक हो जाता है। * देशी गाय के शरीर पर हाथ फेरने से 10 दिन में ब्लड प्रेसर नॉर्मल हो जाता है। * देशी गाय का दूध रोग नाशक और विदेशी गाय का दूध रोग कारक है।    


गुड़ खाने से 18 फायदे :
 1 गुड़ खाने से नहीं होती गैस की दिक्कत

 2 खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता हैं। इसके लिए सबसे बेहतर है कि आप गुड़ खाएं। गुड़ का सेवन करने से आप हेल्दी रह सकते हैं

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स्वास्थ्यवर्द्धक मूंग-मोठ का चिला

विधि :

मूंग व मोठ को अंकुरित कर मिक्सी में पीस कर डोसे जैसा घोल बना लें उसमें नमक व कालीमिर्च मिला लें।

अब तवे पर तेल लगाकर गोल फैला लें, आधा सिकने पर ऊपर कटी सब्जियां व पनीर बुरक दें। चम्मच से हल्का दबा दें व पूरी तरह सेंक कर सॉस के साथ गर्म-गर्म स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्द्धक मूंग-मोठ का चिला टोमॅटो सॉस अथवा हरी चटनी के साथ सर्व करें।

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स्वास्थ्यवर्द्धक मूंग-मोठ का चिला

स्वास्थ्यवर्द्धक मूंग-मोठ का चिला



सामग्री :

  • 1 कप साबुत मूंग
  • 1/2 कप मोठ
  • 1 कप किसा हुआ पनीर
  • 2 प्याज बारीक कटे
  • 2 टमाटर
  • 2 हरी मिर्च
  • हरा धनिया
  • स्वादानुसार कालीमिर्च व नमक।
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चाय-काफी में दस प्रकार के जहर

चाय-काफी में दस प्रकार के जहर


1.      टेनिन नाम का जहर 18 % होता है, जो पेट में छाले तथा पैदा करता है।
2.      थिन नामक जहर 3 होता है, जिससे खुश्की चढ़ती है तथा यह फेफड़ों और सिर में भारीपन पैदा करता है।
3.      कैफीन नामक जहर 2.75 % होता है, जो शरीर में एसिड बनाता है तथा किडनी को कमजोर करता है।
4.      वॉलाटाइल नामक जहर आँतों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है। 

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चाय-काफी में दस प्रकार के जहर

9.      ऑक्सेलिक अम्ल शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक है।
10.  स्टिनॉयल रक्तविहार तथा नपुंसकता पैदा करता है।

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चाय-काफी में दस प्रकार के जहर

5.      कार्बोनिक अम्ल से एसिडिटी होती है।
6.      पैमिन से पाचनशक्ति कमजोर होती है।
7.      एरोमोलीक आँतड़ियों के ऊपर हानिकारक प्रभाव डालता है।
8.      साइनोजन अनिद्रा तथा लकवा जैसी भयंकर बीमारियाँ पैदा करती है।

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पिज़्ज़ा परांठा

परांठे बनाएं:

आटे को पंच करके मसलें और 2 भागों में बांट लें. स्टफिंग को भी 2 भागों में बांट लें. अब आटे के एक भाग को सूखे आटे में लपेटकर पेडा़ बनाकर फिर चकले पर 4-5 इंच तक फैला लें और इसपर स्टफिंग का एक भाग रख लें. इसके कोनों को मोड़ कर पोटली की तरह बना लें. और अच्छे से बंद करके गोल आकार दे दें. अब दूसरे हिस्से को भी इसी तरह तैयार कर लें. दोनों को सूखे आटे में लपेट लें और 10 मिनट के लिए इन्हें ढक कर रख दें जिससे ये थोडा़ और फूल जाएंगे.
तवा गर्म करें. तैयार किए एक गोले को सूखे मैदे में लपेटकर, चकले पर रखें और हाथ से दबाकर थोडा़ चपटा करते हुए फ़ैलाएं ताकि सब्ज़ियां परांठे में चारों तरफ़ फ़ैल जाएं. फिर बेलन से आधा सेमी. मोटा और 8-10 इंच के व्यास वाला परांठा हल्का-हल्का दबाते हुए बेल लें.  
अब गर्म तवे पर तेल लगा चारों तरफ़ फ़ैला दें. अब परांठा तवे पर डालें और हल्की आंच पर सेक कर पलट दें. और फिर सिकी हुई साईड पर थोडा़ सा तेल लगा कर फैला दें और इसे फिर से पलट कर दूसरी साईड भी तेल लगा दें और पलट कर सेकें. परांठे को दोनो तरफ से गोल्डन ब्राउन चित्ती आने तक धीमी आँच पर सेक कर तैयार कर लें.
स्पंजी और क्रिस्पी पिज़्ज़ा परांठा तैयार है. इसे अपनी फेवरिट सास के साथ खाएं. मेहमानों को परोसें या बच्चों को टिफिन में दें. पिज़्ज़ा परांठा सभी को बहुत पसंद आएगा.

ध्यान दें:

अगर आप आटे में ड्राई यीस्ट डाल रहे हैं तो पहले उसे 2 चम्मच पानी में डाल कर चीनी डाल कर, 10 मिनट के लिए रख दें. और फिर एक्टिव करके उसे आटे में डालें.
आप पीज़ा परांठा में अपनी पसंद की सब्ज़ियां डाल सकते हैं और इसे मैदे के जगह गेहूं के आटे से भी बना सकते हैं.
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पिज़्ज़ा परांठा

  • हरा धनियां - 2- 3 टेबल स्पून
  • मोजेरिला चीज़ - 50 ग्राम (कद्दूकस किया हुआ 3/4 कप)
  • काली मिर्च - 1/4 छोटी चम्मच से कम
  • नमक - 1/4 छोटी चम्मच (स्वादानुसार)
  • अदरक - आधा इंच टुकड़ा का पेस्ट
  • हरी मिर्च - 1 छोटी सी, बीज हटा कर बारीक काटी हुई (यदी आपको पसंद है)
  • तेल या घी- 2-3 टेबल स्पून, पिज्जा परांठे पर लगाने के लिये

बनाने की विधि:

किसी बडे़ बर्तन में मैदा डालें. अब इसमें नमक, चीनी, ड्राई एक्टिव यीस्ट और तेल डाल कर अच्छे से मिक्स कर लें और गुनगुने पानी(3/4 कप) से नरम गूंथ लें. अब इसे 5-6 मिनट तक मसलकर चिकना करें और तेल लगाकर 2 घंटे के लिए ढक कर रख दें. इससे आटा फूल कर डबल और नरम हो जाएगा.

स्टफिंग बनाएं:

किसी बडे़ बर्तन में कटी बंद गोभी, शिमला मिर्च, बेबी कार्न, हरा धनिया, मोज़ेरिला चीज़ (कद्दूकस किया हुआ)  और बाकी सारे मसाले डाल कर मिलाएं और इन्हें अच्छे से मिक्स कर लें.
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पिज़्ज़ा परांठा

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पिज़्ज़ा परांठा


पिज़्ज़ा के टेस्ट वाला, पनीर और सब्ज़ीयों से भरा ये परांठा सबको बहुत पसंद आएगा. घर पर तैयार ये परांठा हेल्थ और टेस्ट दोनों का अच्छा पैकेज है और बच्चों को बेहद पसंद आता है.

ज़रूरी सामग्री:

पिज़्ज़ा परांठे के आटे कि लिए:

  • मैदा - 2 कप
  • नमक - 1/2 छोटा चम्मच
  • तेल - 2 टेबल स्पून
  • चीनी - 1 छोटी चम्मच
  • ड्राई एक्टिव यीस्ट - 1 छोटी चम्मच

स्टफिंग के लिए:

  • बन्द गोभी - 1 कप, बारीक कटी हुई
  • शिमला मिर्च - 1 (बारीक कटी हुई)
  • बेबी कार्न - 2-3 बारीक कटे हुये
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हाथ से भोजन करना है "वैज्ञानिक"


          हाथ से भोजन करना है "वैज्ञानिक"

फलाहारी स्वादिष्ट लौकी के पकौड़े

विधि :

सर्वप्रथम लौकी को छिलकर कद्दूकस कर लें।  अब इसमें सभी मसाले व सिंघाड़े का आटा मिला लें।

एक कड़ाही में तेल गर्म करके छोटे-छोटे पकौड़े की तरह बनाकर तल लें। यह लौकी के पकौड़े खाने में बड़े स्वादिष्ट लगेंगे। यह एक झटपट तैयार किया जाने वाला फलाहारी व्यंजन है। इसे दही या हरी चटनी के साथ पेश करें। 

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फलाहारी स्वादिष्ट लौकी के पकौड़े

फलाहारी स्वादिष्ट लौकी के पकौड़े



सामग्री :

  • लौकी (घीया) 250 ग्राम
  • सिंघाड़े का आटा 200 ग्राम
  • 1 चम्मच अदरक व 1 चम्मच हरीमिर्च का पेस्ट
  • नमक
  • जीरा
  • मिर्च स्वादानुसार
  • हरा धनिया
  • तलने के लिए तेल।  
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क्या हम शाकाहारी है ? ( एक बार जरुर पढ़े )

क्या हम शाकाहारी है ? ::( एक बार जरुर पढ़े )
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पश्चिमी दुनिया के अनुसार मुख्य रूप से चार प्रकार के शाकाहारी होते हैं।
1. Lacto-ovo vegetarianism वह लोग जो अण्डे और दूग्ध-उत्पाद खाते हैं लेकिन मीट, मच्छी नहीं खाते।
2. Lacto vegetarianism वह लोग जो दूग्ध-उत्पाद खाते हैं हम हिन्दू जिन्हें शाकाहारी मानते हैं। यह लोग मीट, मच्छी, अण्डे नहीं खाते।
3. Ovo vegetarianism वह लोग जो अण्डे तो खाते हैं मगर मीट, मच्छी और दूग्ध-उत्पाद नहीं खाते।
4. Veganism लोग जो शुद्ध शाकाहारी होते हैं। यह लोग दूध तो क्या शहद भी नहीं खाते। इस के अनुसार हम हिन्दू जो शाकाहार में विश्वास रखते हैं लेक्टो-वेज़ेटेरियनिज़्म (Lacto vegetarianism) के अन्तरगत आते हैं। क्योंकि हम शहद, दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन करते हैं। जैसे- दही, पनीर, मक्खन, घी, मट्ठा, क्रीम आदि।
जो शाकाहार करते हैं उन्हें मांसाहार आरम्भ नहीं करना चाहिए। जेलेटिन (सरेस या श्लेश) हमारे विदेशी मित्रों की बदौलत आजकल हम मूर्खों के बाज़ार में ऐसे बहुत से उत्पाद हैं जोकि गाय और सूअर के मांस से बने हैं। गलती शत-प्रतिशत हमारी है, क्योंकि बाज़ार में ये सब चोरी छुपे नहीं बिक रहा। लेकिन हमने ही अपनी आँखें बन्द कर रखी हैं, हमने कभी जानने की कोशिश ही नही की।
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क्या हम शाकाहारी है ? ( एक बार जरुर पढ़े )

मधुमेह का इंसुलीन इंजेक्शन भी गाय-सूअर से ही बनता है। अभक्ष्य या मांसाहारी वनस्पति आजकल तो वनस्पति भी नॉनवेज है। जब साधारण भारतीय वनस्पति से जुड़े जेनेटिक शब्द को सुनता है तो उसके दिमाग में संकर शब्द आता है। वह सोचता है कि जेनेटिक संकर जैसा ही कोई शब्द है, दो विभिन्न वनस्पितयों के जीन मिलाकार कोई नई नस्ल की वनस्पति तैयार करते होंगे। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। आज विश्व बाजार में सवा सौ से अधिक वनस्पतियां ऐसी हैं जोकि पशुओं से संकरित हैं। यानि मांसाहारी हैं। ख़ास तौर से मांसाहारी टमाटर, आलु, बैंगन, शिमला मिर्च, फूल गोभी, बन्द गोभी आदि अधिक प्रचलन में हैं। सब्जी को अधिक गूदेदार बनाने के उद्देश्य से अधिकतर सब्जियां मांसाहारी बनाई गई हैं अर्थात् उन सब्जियों के बीज में मछली, गाय, सूअर आदि के अंश मिलए जाते है। लेकिन आलु में उस कीड़े के अंश मिलाए जाते हैं जो कीड़ा आलु की फसल को खाता या ख़राब करता है। जिससे की वो कीड़ा उस सजातीय आलु को न खाए। इन मांसाहारी सब्जियों की एक पहचान यह है कि इनको पकाते समय सुगंध के बजाय दुर्गंध आती है। लेकिन कई बार दुर्गंध साधारण सब्जी से भी आती है, ख़ास तौर से दिल्ली जैसे महानगरों में, क्योंकि कुछ किसान गन्दे (नाले के) पानी से अपने खेत की सिंचाई करते हैं। लोग इन मांसाहारी सब्जियों के लिए जर्मनी को जिम्मेदार मानते हैं, क्योंकि वहीं से सब शुरु हुआ।
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क्या हम शाकाहारी है ? ( एक बार जरुर पढ़े )

क्योंकि गाय के शिशु की आँतें दूध के फटने पर पनीर से अलग हो कर पानी में चली जाती हैं। इसका बहुत कम (नहीं के बराबर) अंश ही पनीर में बचता है। यह पानी जो दूध फटने पर निकलता है इसे विदेशों में मट्ठा या छाज (why) कह कर बेचते हैं। प्रवासी हिन्दु भाई कृपा करके यह विदेशी मट्ठा कभी न ख़रीदें। इसलिए बाज़ारू पनीर (सभी प्रकार के पनीर) से भी सावधान रहें। दूध, क्रीम, मक्खन, दही तथा दही की तरह ही दूध से बने (खट्टे) उत्पादों के अतिरिक्त विदेशों में बिक रहे लगभग सभी अन्य दुग्ध-उत्पाद मांसाहारी हैं। ज्यादातर मरगारीन भी मांसाहारी ही है।
इ-नम्बर (E-Numbers) ऐसे रसायन जिनकों खाद्य पदार्थों में मिलाया जाता है, इनकी संख्या आज 3000 से ज्यादा है। ऐसे ही बहुत से अनगिनत रसायन, वास्तव में रसायन नही जीवों का अंश है, लेकिन उन्हें वैज्ञानिक नाम या नम्बर दे दिये गए हैं। जैसे कि आजकल बहुत से खाद्य उत्पादों पर जहां उत्पाद में शामिल (ingredients or contains) पदार्थों (घटकों) की सूचि होती है, उन में कुछ रंग या रंगों के नम्बर भी लिखे होते हैं और कहीं-कहीं इ-नंबर (“E” Numbers) जैसे- E509, E542, E630-E635 वगैरह सिर्फ नम्बर भी लिखे होते हैं। ये सभी No. और ये नाम – calcium stearate, emulsifiers, enzymes, fatty acid, gelatin, glycerol, glycine, glyceryl, glyceral, leucine, magnesium stearate, mono and diglyceri, monostearates, oleic acid, olein, oxystearin, palmitin, palmitic acid, pepsin, polysorbates, rennet, spermaceti, stearin, triacetate, tween, vitamin D3 हमारे लिए घातक हो सकते हैं। इन अन्जान नम्बरों और नामों से सदैव सावधान रहें। कोई भी ई-नंबर शाकाहारी है या मांसाहारी यह तो केवल वह कंपनी ही बता सकती है जिसने उसका उत्पाद या निर्माण किया है। क्योंकि एक ही ई-नंबर को कई तरह से बनाया जाता सकता है। एक ही ई-नंबर कोई कंपनी शाकाहारी फार्मूले से बनाती है और दूसरी कंपनी मांसाहारी फार्मूले से।
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क्या हम शाकाहारी है ? ( एक बार जरुर पढ़े )

आपने कभी वोदका की सफाई पर ग़ौर किया? बहुत-सी रूसी वोदका गाय-सूअर की हड्डी से बने जेलेटिन से साफ की जाती है, अर्थात् हिन्दुओं और मुसलमानों के लिए अभक्ष्य है। वर्क हम जो अपनी मिठाइयों को सजाने के लिए चाँदी की वर्क का इस्तेमाल करते हैं ये भी गोमांस से युक्त होती है। क्योंकि चाँदी को फैलाकर वर्क बनाने के लिए हथौड़ी से पीटा जाता है।

पनीर हम जो पनीर बाज़ार से ख़रीद कर खाते हैं वो भी भरोसेमन्द नहीं है। क्योंकि दूध फाड़ कर पनीर बनाने का जो सबसे सफल रसायन है, जिसका इस्तेमाल अधिकांश पेशेवर लोग करते हैं। वो वास्तव में रसायन नहीं बल्कि गाय के नवजात शिशु का पाचन तन्त्र है। अगर हम पनीर बनाने के लिए दूध में नीम्बू का रस, टाटरी या सिट्रिक एसिड डालते हैं तो दूध इतनी आसानी से नहीं फटता जितना कि उस अंजान रसायन से, फिर घरेलू पनीर में खटास भी होती है, बाज़ार के पनीर की तुलना में जल्दी खट्टा या ख़राब हो जाता है। इस रसायन की यही पहचान है कि पनीर जल्दी ख़राब या खट्टा नही होता, और हमारी सबसे बड़ी यह समस्या यह है कि किसी भी लेबोटरी टेस्ट से ये नही जाना जा सकता कि पनीर को बनाने के लिए गाय के शिशु की आँतों का इस्तेमाल किया गया है।
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क्या हम शाकाहारी है ? ( एक बार जरुर पढ़े )

लेकिन हार्ड-चीज़ के आलावा अन्य चीज़ भी ज्यादातर गौमांस युक्त है। भारत में शायद अभी संभव नहीं है लेकिन विदेशी बाज़ार में इटली की “मासकरपोने क्रीम-चीज़” मिल जाती है जोकि केवल दुग्ध उत्पाद से बनी है (मासकरपोने आम चीज़ से 4-5 गुना मंहगी होती है)। कुछ ऐसी चीज़ कंपनी भी हैं जो गाय की आँतो के साथ-साथ गाय की हड्डी भी चीज़ में डालती हैं। गाय की हड्डी डालने से चीज़ देखने में इकसार लगती है (पीज़े में डलने से पहले)। मूर्खों को पढ़ने में दिक्कत न हो इसलिए पॆकिंग के ऊपर गाय की हड्डी को “कॆलसियम क्लोराईड” या “E 509” लिखा जाता है। हार्ड-चीज़ जैसी ही एक चीज़ होती जिसे परमिजान कहते हैं, कुछ लोगों को भ्रम है कि परमिजान शाकाहारी है, लेकिन ऐसा नही है। हाँ, शायद एक-आध कंपनी हैं जो कि गाय की आँतों की बजाए बकरे की आँत परमिजान-चीज़ में डालती हैं। लेकिन इसके आलावा और क्या-क्या है उस चीज़ में, इस बारे में मैं अभी संतुष्ट नहीं हूँ।
आज भी चीनी सिर्फ “गाय+सूअर” की हड्डी से ही साफ की जाती है। मैं उसी चीनी की बात कर रहा हूँ जो हम प्रति दिन खाते हैं, ख़ास तौर से भारत में, क्योंकि विदेशों में बिना साफ की हुई (भूरी) चीनी बाज़ार में आसानी से मिल जाती है। हम भारतीयों को ही सफेद चीनी खाने की कुछ ज्यादा आदत है। भूरी चीनी में गन्ध भी होती है इसलिए कुछलोग इसे पसंद नहीं करते। डेढ़ सौ साल पहले तक चीनी शाहाहारी थी लेकिन शायद उस समय भारत में चीनी होती ही नहीं थी। 1822 में एक नये अविष्कार के बाद चीनी मांसाहारी होनी शुरु हो गई। पहले चीनी लकड़ी के कोयले से रगड़ कर चीनी साफ़ करते थे। लेकिन गाय-सूअर की हड्डी-खाल का कोयला चीनी को ज्यादा अच्छी तरह साफ करता है, इसलिए अब केवल गाय-सूअर की हड्डी के कोयले का प्रयोग चीनी साफ करने के लिए होता है।
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क्या हम शाकाहारी है ? ( एक बार जरुर पढ़े )

शाकाहारी जेलेटिन बहुत मंहगी होती है । पिज़्ज़ा या पीज़ा (हार्ड-चीज़) पश्चिमी फैशन के मारे हुए हमारे हिन्दू भाई बड़े शौक से वेज़ पीज़ा खाते हैं। क्योंकि पीज़ा पर शाकाहार की हरी मुहर लगी होती है। लेकिन बिचारे मासूम ये नहीं जानते कि “वेज़ पीज़ा” नाम की कोई वस्तु इस संसार में है ही नही। क्योंकि पीजा के ऊपर चिपचिपाहट के लिए जो हार्ड चीज़ बिछाइ जाती है, उस हार्ड चीज़ में गाय की आँतें मिली हुई होती हैं। गाय की आँत डाले बिना हार्ड-चीज़ चिपचिपी नहीं बन सकती। पनीर या छैना को गाय की आँतों में पकाने से ही हार्ड-चीज़ बनती है, दूसरा कोई उपाय नहीं है। और बिना हार्ड चीज़ के कोई भी पीज़ा नहीं बन सकता अर्थात् सभी पीज़ा नॉन-वॆज़ (गाय के मांस से युक्त) होते हैं।
चिपचिपाहट के आलावा भी और बहुत से कारण है कि हार्ड चीज़ गौमांस युक्त होती है। सबसे पहले तो दूध को अधिक चर्बी-युक्त बनाने के लिए दूध में गाय की चर्बी मिलाते हैं फिर दूध से पनीर बनाने के लिए बछड़े की आँते दूध में डालते हैं; फिर पनीर को चीज़ में बदलने के लिए गाय की आँतें उसमें डालते हैं। फिर वह हार्ड-चीज़ सुगठित दिखे इसके लिए गाय की हड्डी का चूर्ण हार्ड-चीज़ में मिलाते हैं।
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हालांकि पॆट्रोलियम से भी ग्लिसरीन बनाई जाती है।
हम ऐसी बहुत-सी दवाइयां खा चुके हैं या खाते हैं जोकि जेलेटिन से कोटेड हैं। आयुर्वेदिक औषिधी भी इससे अछूति नहीं है। “फिलहाल, स्थानीय (भारतीय) बाज़ार में हम सख़्त जेलेटिन कैप्सूल का प्रयोग करते हैं, उस जेलेटिन कैप्सूल में गोवंश की हड्डीयों से बना औषधीय स्तर का जेलेटिन होता है”।
हालांकि शाकाहारी जेलेटिन भी होती है, मगर बहुत मंहगी होती है, क्योंकि यह शाकाहारी जेलेटिन किसी ख़ास समुद्री घास से बनती है। शाकाहारी जेलेटिन को “कैराज़ीन या ज़ेलोज़ोन” कहते हैं। जोकि अधिकतर “अगर-अगर” नामक समुद्री वनस्पति से बनती है। जबकि साधारण जेलेटिन बूचड़-खाने की फेंकी हुई बेकार की या बहुत सस्ती, बड़ी-बड़ी हड्डीयों और छोटे-छोटे चमड़े के टुकड़ों वगैरा से बनती है।
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Monday, 28 September 2015

चिल्ली पनीर

  • चिल्ली सास - 1-2 छोटी चम्मच
  • हरी मिर्च - 2-3 ( छोटी छोटी काट लीजिये)
  • अदरक - 1 इंच टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)
  • नमक - आधा छोटी चम्मच (स्वादानुसार)
  • काली मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
  • चिल्ली फ्लेक्स -1/4 छोटी चम्मच
  • अजीनो मोटो - 1- 2 पिंच
  • पोदीना के पत्ते - 10 -12

बनाने की विधि:

पनीर को चौकोर टुकडों में काट लें. अब एक प्लेट में कार्न फ़्लोर लेकर पनीर के टुकडों को उसमें अच्छे से लपेट लें. नानस्टिक की कढा़ई में 2 चम्मच तेल चारों तरफ़ फ़ैला कर गर्म करें और उसमें पनीर के टुकडे़ डाल कर पलट-पलट कर हल्के ब्राउन होने तक सेक लें और फिर किसी बर्तन में निकाल लें.
अब बाकी बचा तेल कढा़ई में डालकर गर्म करें और इसमें अदरक और हरी मिर्च डाल कर थोडा़ भून लें. हरी शिमला मिर्च डाल कर 1 मिनट भूनने के बाद लाल शिमला मिर्च डाल कर 1 मिनट भून लें. अब इसमें पनीर के टुकडे़, सोया सास, ट्मैटो सास, चिल्ली सास, विनेगर, अजीनोमोटो, नमक, चिल्ली फ़्लेक्स और काली मिर्च डाल कर, धीमी आंच पर चलाते हुए अच्छे से मिलाएं.
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चिल्ली पनीर

बचे कार्न फ़्लोर को ¼ कप पानी में अच्छे से घोलें ताकि गुठलियां खत्म हो जाएं और फिर इसे चिल्ली पनीर में मिला दें. अब इसे 1-2 मिनट के लिए चम्मच से चलाते हुए पकाएं. आपका चिल्ली पनीर तैयार है. पुदीने के मोटे-मोटे पत्ते तोड़ कर डालें और अपनी मनचाही डिश के साथ सर्व करें.

ध्यान दें:

अगर आपको लहसुन प्याज़ वाला चिल्ली पनीर पसंद है तो 1 प्याज़ और 5-6 लहसुन की कलियां बारीक काट लें तेल में अदरक भूनने से पहले प्याज़ और लहसुन को हल्का गुलाबी होने तक भून लें और बाकी उसी क्रम में बना लें.
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चिल्ली पनीर


चिल्ली पनीर



चिल्ली पनीर को आप स्नैक्स, स्टार्टर के रूप में, खाने के साथ या ज़ैसे चाहें वैसे खा सकते हैं. इस चाईनिज़ डिश का भारतीय ज़ायका आपको बेहद पसंद आएगा. चिल्ली पनीर टेस्टी होने के साथ-साथ हेल्दी डिश भी है.

ज़रूरी सामग्री:

  • पनीर - 300 ग्राम
  • ग्रीन कैप्सीकम - 1 ( मीडियम साइज में कटी हुई )
  • रैड कैप्सीकम - 1 ( मीडियम साइज में कटी हुई)
  • कार्न फ्लोर - 3-4 टेबल स्पून
  • टमाटो सास - 1/4 कप
  • ओलिव ओइल - 1/4 कप
  • सिरका - 1 -2 छोटी चम्मच
  • सोया सास - 1-2 छोटी चम्मच
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गोभी, गाजर और शलजम का मीठा आचार

कढा़ई में तेल गरम करके धीमी आँच पर हींग, हल्दी पाउडर और सारे कुटे मसाले डाल कर हल्का सा भून लें. अब गाजर, शलजम और गोभी के काट कर सुखाए हुए टुकडे़ डाल दें. साथ ही नमक और लाल मिर्च भी डाल लें. अब इन सबको चलाते हुए अच्छे से मिलाकर गैस बंद कर दें.
एक दूसरे बर्तन में सिरका और गुड़ डाल कर गरम करें. जब तक गुड़ ना पिघले इसे पकाते रहें. गुड़ के पिघने पर इसे छान लें. और मसाले वाली सब्ज़ियों में मिला लें. अब कुटी हुई इलायची और खजूर डाल कर मिलाएं. आचार अगर पतला लगे तो इसे गाढा़ होने तक पका लें.
आचार तैयार है. इसे ठंडा करके कंटेनर में भरकर रख लें. इसी तुरंत खाया जा सकता है लेकिन 4-5 दिन के बाद मसालों का स्वाद सब्ज़ियों में अच्छे से आ जाता है और आचार बेहद स्वादिष्ट लगता है.

ध्यान दें:

इस आचार को आप 6 महीनों तक आराम से खा सकते हैं.
अगर बाद में भी आचार में ज़्यादा जूस लगे तो इसे पका कर गाढा़ कर लें.
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गोभी, गाजर और शलजम का मीठा आचार

बनाने की विधि:

गरम पानी में 1 छोटी चम्मच नमक डाल कर उसमें गोभी के टुकडों को 10 मिनट के लिए डाल दें और धोकर निकाल लें. गाजर और शलजम को धोकर, छील कर लंबा काट लें.
जीरा, मेथी, लौंग, दालचीनी, राई, काली मिर्च और सौंफ को दरदरा पीस लें और बडी इलायची के दाने निकाल कर कूट कर अलग रख लें. खजूर के बीज निकाल कर इन्हें पतला और लंबा काट लें.
अब एक बर्तन में पानी उबालना रख दें. ध्यान रहे कि पानी इतना हो कि इसमें सारी सब्ज़ियां डूब जाएं. पानी में जब 1 उबाल आ जाए तो इसमें सब्ज़ियां डाल कर ढक दें और 2-3 मिनट बाद गैस बंद कर दें. सब्ज़ियों को पानी में 10 मिनट के लिए ऎसे ही पडा़ रहने दें. इससे सब्ज़ियां हल्की सी नरम हो जाएंगी.
अब किसी छलनी से पानी को छान दें और सारी सब्ज़ियों को एक सूती के सूखे कपडे़ पर डाल कर फ़ैला दें. इन्हें धूप में 2 घंटे के लिए सुखा लें. अगर धूप ना हो तो छाया में 3-4 घंटे फैला कर सुखा लें.
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गोभी, गाजर और शलजम का मीठा आचार

गोभी, गाजर और शलजम का मीठा आचार



गोभी गाजर और शलजम का मीठा आचार बहुत स्वादिष्ट बनता है. परांठों के साथ तो ये आचार और भी अच्छा लगता है. तो इस बार ये आचार ज़रूर बनाएं.

ज़रूरी सामग्री:

  • गोभी, गाजर, शलजम - 1 कि.  ग्राम.
  • जीरा -1 1/2 छोटी चम्मच
  • मैथी - 1 1/2छोटी चम्मच
  • सौंफ - 2 छोटी चम्मच
  • राई - 1 1/2 टेबल स्पून
  • गरम मसाला - 1 छोटी चम्मच
  • अदरक पाउडर - 1 छोटी चम्मच
  • हींग - एक चौथाई छोटी चम्मच
  • हल्दी पाउडर - 1 छोटी चम्मच
  • बड़ी इलाइची - 5-6 (छील कर कूटी हुई)
  • खजूर - 10-12 (पतले पतले काटे हुए)
  • लाल मिर्च - एक चौथाई छोटी चम्मच
  • तेल - 150 ग्राम (3/4 कप)
  • सादा नमक - 2 छोटे चम्मच
  • काला नमक - 1 छोटी चम्मच
  • सिरका - ( 3/4 कप )
  • गुड़ - 300 ग्राम (टुकड़े किये हुये 1 1/2 कप)
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गुर्दे की पथरी नाशक 25 घरेलू उपचार

२२/ कमलीशोरा:
कमलीशोरा, गंधक और आमलासार 10-10 ग्राम अलग-अलग पीसकर मिला लें और हल्की आग पर गर्म करने के 1-1 ग्राम का आधा कप मूली के रस के साथ सुबह-शाम लेने से गुर्दे की पथरी में लाभ मिलता है।
२३/
आलू:

एक या दोनों गुर्दो में पथरी होने पर केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक मात्रा में पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियां और रेत आसानी से निकल जाती हैं। आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो पथरी को निकालता है तथा पथरी बनने से रोकता है।
२४/ तुलसी:
20 ग्राम तुलसी के सूखे पत्ते, 20 ग्राम अजवायन और 10 ग्राम सेंधानमक लेकर पॉउड़र बनाकर रख लें। यह 3 ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से गुर्दे का तेज दर्द दूर होता है।
२५/ पके हुए प्याज का रस पीना पथरी निकालने के लिए बेहद लाभ प्रद उपाय है| दो मध्यम आकार के प्याज लेंकर भली प्रकार छीलें | एक गिलास जल में डालकर मध्यम आंच पर पकाएं| अब इस मिश्रण को मिक्सर में डालकर चलाएं | इस रस को छानकर पियें| ७ दिन तक यह उपचार करने से पथरी के टुकड़े निकल जाते हैं|
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गुर्दे की पथरी नाशक 25 घरेलू उपचार

१८) जवाखार:
गाय के दूध के लगभग 250 मिलीलीटर मट्ठे में 5 ग्राम जवाखार मिलाकर सुबह-शाम पीने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है।
जवाखार और चीनी 2-2 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ खाने से पथरी टूट-टूटकर पेशाब के साथ निकल जाती है। इस मिश्रण को रोज सुबह-शाम खाने से आराम मिलता है।
१९) पालक:
100 मिलीलीटर नारियल का पानी लेकर, उसमें 10 मिलीलीटर पालक का रस मिलाकर पीने से 14 दिनों में पथरी खत्म हो जाती है।
पालक के साग का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से पथरी में लाभ मिलता है।
२०) गोक्षुर:
गोक्षुर के बीजों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन 2 बार खाने से पथरी खत्म होती है।
२१/ फिटकरी:
भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम दिन में 3 बार रोगी को पानी के साथ सेवन कराने से रोग ठीक होता है।
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गुर्दे की पथरी नाशक 25 घरेलू उपचार

१३) बथुआ की सब्जी आधा किलो लें। इसे ८०० मिलि पानी में उबालें। अब इसे कपडे या चाय की छलनी में छान लें। बथुआ की सब्जी भी भी इसमें अच्छी तरह मसलकर मिलालें। काली मिर्च आधा चम्मच और थोडा सा सेंधा नमक मिलाकर पीयें। दिन में ३-४ बार प्रयोग करते रहने से गुर्दे के विकार नष्ट होते हैं और पथरी निकल जाती है।
१४) प्याज में पथरी नाशक तत्व होते हैं। करीब ७० ग्राम प्याज को अच्छी तरह पीसकर या मिक्सर में चलाकर पेस्ट बनालें। इसे कपडे से निचोडकर रस निकालें। सुबह खाली पेट पीते रहने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।
१५) सूखे आंवले बारीक पीसलें। यह चूर्ण कटी हुई मूली पर लगाकर भली प्रकार चबाकर खाने से कुछ ही हफ़्तों में पथरी निकलने के प्रमाण मिले हैं।
१६) स्टूल पर चढकर १५-२० बार फ़र्श पर कूदें। पथरी नीचे खिसकेगी और पेशाब के रास्ते निकल जाएगी। निर्बल व्यक्ति यह प्रयोग न करें।
१७) मिश्री,सौंफ,सूखा धनिया सभी ५०-५० ग्राम की मात्रा में लेकर रात को डेढ़ लीटर पानी में भिगोकर रख दीजिए २४ घंटे बाद छानकर सौंफ, धनिया पीसकर यह पेस्ट पुन; तरल मिश्रण में घोलकर पीते रहने से मूत्र पथरी निकल जाती है|
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गुर्दे की पथरी नाशक 25 घरेलू उपचार

९) शोध में पाया गया है कि विटमिन बी६ याने पायरीडोक्सीन के प्रयोग से पथरी समाप्त हो जाती है और नई पथरी बनने पर भी रोक लगती है। १०० से १५० एम जी की खुराक कई महीनों तक लेने से पथरी रोग का स्थायी समाधान होता है।

१०. अंगूर में पोटेशियम और पानी की अधिकता होने से गुर्दे के रोगों लाभदायक सिद्ध हुआ है। इसमें अल्बुमिन और सोडियम कम होता है जो गुर्दे के लिये उत्तम है।

११. गाजर और मूली के बीज १०-१० ग्राम,गोखरू २० ग्राम,जवाखार और हजरूल यहूद ५-५ ग्राम लेकर पावडर बनालें और ४-४ ग्राम की पुडिया बनालें। एक खुराक प्रत: ६ बजे दूसरी ८ बजे और तीसरी शाम ४ बजे दूध-पानी की लस्सी के साथ लें। बहुत कारगर उपचार है|

१२) पथरी को गलाने के लिये चौलाई की सब्जी गुणकारी है। उबालकर धीरे-धीरे चबाकर खाएं।दिन में ३-४ बार यह उपक्रम करें।
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गुर्दे की पथरी नाशक 25 घरेलू उपचार

५) पानी में शरीर के विजातीय पदार्थों को बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है। गरमी में ४-५ लिटर और सर्द मौसम में ३-४ लिटर जल पीने की आदत बनावें।

६) दो तीन सेवफ़ल रोज खाने से पथरी रोग में लाभ मिलता है।

७) तरबूज में पानी की मात्रा ज्यादा होती है । जब तक उपलब्ध रहे रोज तरबूज खाएं। तरबूज में पुरुषों के लिये वियाग्रा गोली के समान काम- शक्ति वर्धक असर भी पाया गया है।

८) कुलथी की दाल का सूप पीने से पथरी निकलने के प्रमाण मिले है। २० ग्राम कुलथी दो कप पानी में उबालकर काढा बनालें। सुबह के वक्त और रात को सोने से पहिले पीयें।

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गुर्दे की पथरी नाशक 25 घरेलू उपचार

रोग के निदान के लिये सोनोग्राफ़ी करवाना चाहिये।वैसे तो विशिष्ठ हर्बल औषधियों से ३० एम एम तक की पथरी निकल जाती है लेकिन ४-५ एम एम तक की पथरी घरेलू नुस्खों के प्रयोग से समाप्त हो सकती हैं। मैं ऐसे ही कुछ सरल नुस्खे यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।
१..तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच एक चम्मच शहद में मिलाकर जल्दी सबेरे लें। ऐसा ५-६ माह तक करने से छोटी पथरी निकल जाती है।
२) मूली के पत्तों का रस २०० एम एल दिन में २ बार लेने से पथरी रोग नष्ट होता है।
३) दो अन्जीर एक गिलास पानी मे उबालकर सुबह के वक्त पीयें। एक माह तक लेना जरूरी है।
४) नींबू के रस में स्टोन को घोलने की शक्ति होती है। एक नींबू का रस दिन में १-२ बार मामूली गरम जल में लेना चाहिये।
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गुर्दे की पथरी नाशक 25 घरेलू उपचार

गुर्दे की पथरी नाशक 25  घरेलू उपचार


किडनी,,युरेटर या ब्ला्डर, में पथरी निर्माण होना एक भयंकर पीडादायक रोग है। मूत्र में पाये जाने वाले रासायनिक पदार्थों से मूत्र अन्गों में पथरी बनती है,जैसे युरिक एसिड,फ़स्फ़ोरस केल्शियम और ओ़क्झेलिक एसिड। जिन पदार्थों से पथरी निर्माण होती है उनमें केल्शियम ओक्झेलेट प्रमुख है। लगभग ९० प्रतिशत पथरी का निर्माण केल्शियम ओक्झेलेट से होताहै। गुर्दे की पथरी( kidney stone) का दर्द आमतौर पर बहुत भयंकर होता है। रोगी तडफ़ उठता है। पथरी जब अपने स्थान से नीचे की तरफ़ खिसकती है तब यह दर्द पैदा होताहै। पथरी गुर्दे से खिसक कर युरेटर और फ़िर युरिन ब्लाडर में आती है। पेशाब होने में कष्ट होता है,उल्टी मितली,पसीना होना और फ़िर ठड मेहसूस होना ,ये पथरी के समान्य लक्षण हैं।नुकीली पथरी से खरोंच लगने पर पेशाब में खून भी आता है।इस रोग में पेशाब थोड़ी मात्रा में कष्ट के साथ बार-बार आता है|
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गाजर मेथी की सब्जी

बनाने की विधि :

  1. मेथी के मोटे डंठल हटाकर मेथी की पत्तियों को बहुत अच्छे से धो लें. इसके बाद इसे 5 मिनट के लिए छलनी पर छोड़ दें जिससे इनका अतिरिकत पानी निकल जाए.

ताजी मेथी की पत्तियाँ

  1. अब इन मेथी को बारीक काट लें.
  2. गाजर को अच्छे से धो लें. अगर ज़रूरत हो तो बाहरी त्वचा हटाएँ. अब इसे छोटे टुकड़ों में काट लें.
  3. अब एक कड़ाही में मध्यम आँच पर तेल गरम करें. जब तेल गरम हो जाए तो इसमें जीरा डालें और कुछ सेकेंड के लिए भूनें और फिर हींग डालें. आँच को धीमा करके हरी मिर्च और बारीक कटी अदरक डालें. अब इसे कुछ सेकेंड्स के लिए भूनें.
  4. अब इसमें कटी मेथी डालें और इसे दो मिनट के लिए मध्यम आँच पर भूनें.
  5. अब गाजर के टुकड़े डालें और इसे मेथी के साथ अच्छे से मिलाएँ. गाजर मेथी को एक मिनट के लिए मध्यम आँच पर भूनें.
  6. अब गाजर मेथी में नमक, लाल मिर्च, और पीसा धनिया डालें. सभी सामग्री को अच्छे से मिलाएँ. गाजर के गलने तक ढक कर पकाएँ. इसमें तकरीबन 5 मिनट का समय लगता है.
  7. जब गाजर गाल जाए तो इसमें गरम मसाला और अमचूर पाउडर डालकर सब्जी को दो मिनट के लिए भूनें. आँच बंद कर दें. स्वादिष्ट गाजर मेथी की सब्जी अब तैयार है परोसने के लिए.
  8. गाजर मेथी की सब्जी को आप रोटी, पूरी, पराठा या फिर दाल चावल किसी के साथ भी सर्व कर सकते हैं.

कुछ नुस्खे / सुझाव

  1. आप गाजर मेथी की इस स्वादिष्ट सब्जी में हरी मटर भी डाल सकते हैं.

गाजर मेथी की सब्जी

गाजर मेथी की सब्जी



सामग्री

(4 लोगों के लिए)
  • 1 गडॅडी मेथी
  • 250 ग्राम गाजर
  • 1 छोटा चम्मच जीरा
  • 2-3 चुटकी हींग
  • 1-2 हरी मिर्च, बारीक कटी
  • 1 छोटा चम्मच अदरक, बारीक कटा
  • 1 छोटा चम्मच नमक
  • ¼ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1½ छोटा चम्मच पिसा धनिया
  • ½ छोटा चम्मच अमचूर. खटाई
  • ¼ छोटा चम्मच गरम मसाला
  • 1½ बड़ा चम्मच तेल
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आंवला गुणों की खान (आंवले के 17 गुण जानिये )

15. आवाज बैठ गई हो, तो पिसे आंवले की फंली लें। 

16. आंवले में बाल करने के गुण है। आंवला बहुत खट्टा इसलिये सफाई अच्छी करता है बालों की। साथ रोज आंवले का सेवन करें। 

17. बुढ़ापा दूर रखता है। सूखे आंवले का चूर्ण 2 चम्मच रोज रोटी में रखकर खायें। बुढ़ापा दूर रहेगा जवानी बनी रहेगी।

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आंवला गुणों की खान (आंवले के 17 गुण जानिये )

12. गर्भावस्था में उल्टी हो रही हो, तो आंवले का मुरब्बा खायें। 

13. आंवले के चूर्ण का उबटन चेहरे पर लगाये चेहरा साफ होगा दाग धब्बे दूर होंगे। 

14. गर्मियों में चक्कर आता हो जी घबराता हो तो आंवले का शर्बत पियें।
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आंवला गुणों की खान (आंवले के 17 गुण जानिये )

9. नित्य 1-2 ताजे आंवले का रस पीने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं। पांच दिन तक बराबर पियें। 

10. जो लोग स्वस्थ रहना चाहते हैं वो ताजा आंवला का रस शहद में मिलाकर पीने के बाद ऊपर से दूध पियें इससे स्वास्थ अच्छा रहता है। दिन भर प्रसन्नता का अनुभव होता है। नई शक्ति व चेतना देता है। यौवन बहार आयेगा।

11. आंवले का रस पीने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।
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आंवला गुणों की खान (आंवले के 17 गुण जानिये )

6. आंवले का चूर्ण मूली में भरकर खाने से मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है।

 7. आंवले के रस में शहद मिलाकर खाने से मधुमेह में लाभ होता है।

 8. रात के आंवले का चूर्ण भीगो कर पानी पीये सुबह पेट साफ होता है। पाचन शक्ति बढ़ती है।
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आंवला गुणों की खान (आंवले के 17 गुण जानिये )

3. आंवला ब्लडप्रेशर वालों के लिये लाभप्रद है।

 4. आंवला टूटी हड्डियों को जोड़ने वाला है। 

5. जिन्हें नकसीर होता हो (नाक से खून) सूखा आंवला रात में भिगाकर उस पानी से सर धोयें। आंवले का मुरब्बा खायें। आंवले का रस नाक में टपकायें। 
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आंवला गुणों की खान (आंवले के 17 गुण जानिये )

आंवला गुणों की खान (आंवले के 17 गुण जानिये )


आंवला के गुण आंवले में सारे रोग दूर करने के गुण व शक्ति होती है। आंवला युवकों को भी यौवन शक्ति प्रदान करता है तथा बूढ़ों को युवा जैसी शक्ति देता है। बशर्ते आंवला किसी न किसी रूप में रोज सेवन करें। आंवले में विटामिन सी भरपूर होता है। हर इंसान को प्रतिदिन 50 मिली ग्राम विटामिन सी की जरूरत होती है। एक आंवला दो संतरे के बराबर होता है। आंवले का मुरब्बा ताकत देने वाला होता है। 

 1. गर्भवती स्त्रियों को आंवला अवश्य लेना चाहिये। किसी भी रूप में लें।
 2. आंवला एक अंण्डे से अधिक बल देता है। 
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